आँखों में अब निंद नहीं है
मेरी आँखों में अब निंद नहीं है
ना सपने है इन आंखों में अब
पलकें बंद होती है मगर
सोती नहीं रातों में अब
थका शरीर होता है ओर
आँखें भारी भी होती है
मगर जीवन की सच्चाई जानकर
अब नींद नहीं आती इन आंखों में
कब से शायद सोया नहीं हूँ
अब याद भी नहीं पक्की नींद कैसी होती है
शायद मां के प्यार जैसी खूबसूरत होती है
सोया होता हूँ फिर भी आँखें ये जगी रहती है
पुराने अधुरे ख्वाब याद कर
मुझे ये जगा कर रखती है
आँखों में अब निंद नहीं है
ना सपने है इन आंखों में अब
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